दुबई स्थित वीज़ा सलाहकार कंपनी Rayad Group ने सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी है। कंपनी ने भारतीय नागरिकों के लिए लगभग ₹23.3 लाख में “लाइफटाइम UAE गोल्डन वीज़ा” दिलाने का झूठा दावा किया था, जिससे भारी भ्रम फैल गया।
Rayad Group ने बुधवार को एक बयान में कहा कि उसने अपने पहले के बयानों से हुई “ग़लतफहमी” की पूरी ज़िम्मेदारी ली है और भविष्य में अधिक सटीक और स्पष्ट संचार का आश्वासन दिया। कंपनी ने कहा:
“हाल की रिपोर्ट्स और टिप्पणियों से जनता में जो भ्रम फैला, उसके लिए हम बिना शर्त माफ़ी मांगते हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि आगे हमारा संचार UAE के सख़्त नियमों के अनुरूप, सही और स्पष्ट हो।”
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रयाद कमाल अयूब ने पहले इस स्कीम को भारतीयों के लिए “गोल्डन अवसर” बताया था, लेकिन अब कंपनी ने किसी भी तरह की प्राइवेट एडवाइजरी सर्विसेज़ से हाथ खींच लिए हैं।
UAE सरकार का खंडन: ‘लाइफटाइम वीज़ा जैसी कोई चीज़ नहीं’
UAE की Federal Authority for Identity, Citizenship, Customs and Port Security (ICP) ने इस दावे को पूरी तरह झूठा बताया। ICP ने साफ कहा कि किसी भी तरह का “लाइफटाइम UAE रेज़ीडेंसी प्रोडक्ट” मौजूद नहीं है और आवेदन सिर्फ़ सरकारी चैनलों के ज़रिए ही स्वीकार किए जाते हैं।
ICP ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी संस्था या व्यक्ति इस तरह के फ़र्ज़ी दावे कर के पैसे वसूलने की कोशिश करेगा, तो उसके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आवेदकों से अपील की कि केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और निजी दस्तावेज़ किसी अनधिकृत व्यक्ति या संस्था को न सौंपें।
“सभी गोल्डन वीज़ा आवेदन केवल UAE के भीतर आधिकारिक सरकारी चैनलों के माध्यम से ही स्वीकार होते हैं।” – ICP का बयान
मीडिया में कैसे फैली ग़लत ख़बर
PTI समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स में Rayad Group के हवाले से कहा गया था कि भारत और बांग्लादेश पहले चरण में नामांकन आधारित नई गोल्डन वीज़ा योजना में शामिल हैं और भारतीय नागरिक लगभग ₹23.3 लाख (AED 100,000) देकर वीज़ा प्राप्त कर सकते हैं।
बाद में Rayad Group ने सफ़ाई दी कि ₹23.3 लाख की रकम असल में उनकी सर्विस फ़ीस थी, न कि यूएई सरकार की तरफ़ से लिया जाने वाला वीज़ा शुल्क। कंपनी ने कहा:
“कोई गारंटीड वीज़ा, फ़िक्स्ड-प्राइस प्रोग्राम या लाइफटाइम यूएई रेज़ीडेंसी प्रोडक्ट इस वक़्त मौजूद नहीं है और Rayad Group ऐसी किसी भी व्यवस्था को न पेश करता है, न समर्थन करता है।”
विशेषज्ञ की राय: ‘ये भारतीयों को ठगने की स्कीम थी’
इमिग्रेशन अटॉर्नी प्रशांत अजे़रा (Ajmera Law Group) ने Business Standard से बातचीत में कहा कि यह पूरी स्कीम फ़र्ज़ी थी, सिर्फ़ भारतीयों को ठगने के लिए बनाई गई थी।
“ऐसी कंपनियाँ भारतीय बाज़ार को टार्गेट करती हैं, क्योंकि यहाँ विदेश में बसने की चाहत रखने वाले लोगों की कमी नहीं है,” – अजे़रा
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएई किसी भी इमिग्रेशन प्रोग्राम के तहत विदेशी नागरिकों को नागरिकता (Citizenship) नहीं देता।
“हमेशा आधिकारिक सरकारी जानकारी चेक करें और भरोसेमंद इमिग्रेशन अटॉर्नी से ही सलाह लें।”
