मानिए या न मानिए, अब एयर इंडिया के यात्रियों के लिए टेकऑफ का रोमांच वैसा ही हो गया है जैसे रेलवे प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर ये सोचना कि ट्रेन आएगी या रद्द हो जाएगी। दिल्ली से कोलकाता जा रही फ्लाइट AI2403 एकदम 155 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी, लेकिन तभी पायलट साहब ने ब्रेक मार दिए। कारण? “टेक्निकल इश्यू” और हां, “SOP के तहत निर्णय लिया गया।” SOP अब इतना मजबूत हो चुका है कि भगवान भी कहें तो शायद कहा जाए, “पहले SOP देख लीजिए”।
अब आप सोच रहे होंगे कि टेक्निकल दिक्कतें आती हैं, इसमें मजाक कैसा? भाई, बात एक बार की होती तो चल जाता। लेकिन एक ही दिन में दो हादसे? मुंबई में कोच्चि से आई फ्लाइट रनवे से फिसल गई और प्लेन की पूंछ में घास का गुच्छा लटका मिला, जैसे प्लेन खेतों की सैर कर आया हो। इंजन पर निशान, रनवे पर बर्बादी—और फिर वही वाक्य, “सभी यात्री सुरक्षित हैं, खेद है।” एयर इंडिया का PR विभाग अब शायद Copy-Paste से ही काम चला रहा है।
और मजेदार बात यह कि खुद सरकार ने संसद में बताया कि पिछले छह महीने में एयर इंडिया को नौ शो-कॉज नोटिस दिए गए हैं। पांच अलग-अलग सुरक्षा उल्लंघनों पर। लेकिन टेंशन न लीजिए, “कोई गंभीर ट्रेंड नहीं देखा गया है।” हां, शायद जब प्लेन उड़ते समय ही घर में घुस जाए, तब ट्रेंड की पहचान होगी।
अब सबसे दिल दहलाने वाली बात: पिछले महीने एयर इंडिया की अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट टेकऑफ के कुछ देर बाद क्रैश हो गई, जिसमें 260 लोगों की मौत हो गई, बस एक यात्री बचा—वो भी शायद इसलिए क्योंकि वो 11A पर बैठा था, न कि SOP के खिलाफ।
इस सब के बीच, यात्रियों को फिर कहा गया है कि “आपका आराम और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।”
सवाल ये है कि अगर ये प्राथमिकता है, तो बाकी चीज़ें कौन संभाल रहा है—भाग्य?
शुक्र है कि अब पायलट कमांड से पहले SOP देख लेते हैं, नहीं तो एयर इंडिया की हर उड़ान एक लॉटरी बन चुकी होती—उड़ेंगे या उतरेंगे, या फिर रुक ही जाएंगे।
तो अगली बार जब एयर इंडिया की टिकट बुक करें, साथ में कोई भजन की किताब और धैर्य भी पैक कर लीजिए—क्योंकि रनवे पर 155 किमी/घंटा की रफ्तार से भी गाड़ी रुकेगी या उड़ेगी, ये अब SOP तय करेगा, पायलट नहीं।
