लखनऊ के कुख्यात गैंगस्टर सलीम सोहराब का सबसे छोटा भाई रुस्तम उर्फ सोहराब तिहाड़ जेल से तीन दिन की पैरोल पर अपनी पत्नी से मिलने निकला था, लेकिन तय समय पर वापस वापस नहीं पहुंचा
इसके बाद दिल्ली और यूपी पुलिस अलर्ट पर आ गई और UP एसटीएफ को ढूँढ़ने की जिम्मेवारी दी गई |
रामज़ान की रात से शुरू हुआ बदला
यह परिवार 2005–06 के खूनी घटनाओं के लिए कुख्यात है।
- रमज़ान की चांद रात को उनके छोटे भाई शहज़ादे की हत्याओं का बदला उन्होंने ईद पर चुकाया।
- इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी सेफी और पूर्व सांसद के नाती की हत्या जैसे संगीन कांड भी उनके नाम दर्ज हैं।
पैरोल मिलना कितना सुरक्षित है?
तिहाड़ जेल, जिसे एशिया की सबसे सुरक्षित (!!) जेलों में गिना जाता है, के भीतर से बाहर आकर इतना खतरनाक अपराधी बच निकलता है, यह सवाल खड़ा करता है।
जनता में भय का माहौल तेज़ी से फैल रहा है ।
STF की पूछताछ और सख़्ती
- दिल्ली की स्पेशल सेल ने यूपी एसटीएफ से संपर्क किया और तलाशी शुरू की ।
- कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है, साथ ही उसके बंदूकधार सहयोगियों पर भी निगरानी तेज़ है
राजनीतिक असर — कानून में छेद या सियासी सहमति?
- जब अपराधी इतना खतरनाक हो और पैरोल पर भाग जाए, तो सवाल उठता है कि क्या सियासी प्रभाव का भी हाथ था?
- UP में ‘गुंडाराज’ की राजनीतिक नज़र में कानून और प्रशासन को कैसे मोड़ा जा रहा है — इसका यह एक और सबूत है।
लोकतंत्र पर सवाल
- इस घटना ने इस बात का भी अंदेशा बढ़ाया है कि क्या ‘प्रोटेक्ट एंड करो’ की बजाय, ‘प्रोटेक्ट से गेम करो’ वाली राजनीति हावी हो रही है?
- क्या सरकार रेगुलर व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है, या केवल चित्रण और संकेतों पर निर्भर?
निष्कर्ष
| बिंदु | विश्लेषण |
|---|---|
| पैरोल और सुरक्षा | जब एशिया की सबसे सुरक्षित जेल से अपराधी भाग जाए, तब सवाल कि पारदर्शिता कहाँ है? |
| गैंगस्टर का नेटवर्क | सलीम परिवार का नेटवर्क अब भी सक्रिय — पैरोल एक संकेत? |
| सियासी-प्रशासनिक संतुलन | क्या प्रशासन केवल कानून चलता है, या कोई छिपा एजेंडा? |
| जनता की धारणा | भय और असुरक्षा की भावना — समाज में शंका की राजनीति को हवा मिल सकती है। |
