February 9, 2026
Group of adults enjoying a summer pool party with colorful inflatable floats and water guns.

उत्तर प्रदेश के कानपुर में रविवार को 24 वर्षीय शिखर सिंह की स्विमिंग पूल में डूबकर मौत हो गई। घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि शिखर दो मिनट तक अपनी जान के लिए जूझता रहा, लेकिन न तो दोस्तों को अहसास हुआ और न ही मौके पर मौजूद किसी जिम्मेदार ने समय रहते कदम उठाया। यह घटना सिर्फ एक दुखद हादसा नहीं है, यह हमारे समाज में मौज-मस्ती के नाम पर लापरवाही और सुरक्षा के ढुलमुल इंतजामों की एक और कड़वी मिसाल बनकर उभरी है।


वीडियो में दिखी मौत की बेबसी

सुरक्षा कैमरे में कैद इस पूरी घटना ने दिल दहला दिया। शिखर सिंह पार्टी के दौरान गहराई में चला गया और लगातार संघर्ष करता रहा। उसने करीब दो मिनट तक खुद को बचाने की कोशिश की, हाथ-पैर मारता रहा, लेकिन वहां मौजूद दोस्त, जो उसी पार्टी का हिस्सा थे, उसे नोटिस तक नहीं कर पाए।

जब दो मिनट बाद भी शिखर की ओर से कोई हरकत नहीं दिखी, तब जाकर दोस्तों ने उसे बाहर निकाला। अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


हादसे की जड़: लापरवाही और जिम्मेदारी का अभाव

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्विमिंग पूल में यह पार्टी चल रही थी, वहां कोई प्रशिक्षित लाइफगार्ड क्यों नहीं था?

👉 क्या पूल मैनेजमेंट की जिम्मेदारी नहीं थी कि सुरक्षा इंतजाम पुख्ता रखे जाएं?
👉 क्या आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया कि गहराई का अंदाजा और सावधानियां सभी को दी जाएं?
👉 और सबसे दुखद यह कि क्या दोस्तों की मस्ती इतनी हावी थी कि किसी की जान जाती रही और उन्हें खबर तक न हुई?

यह हादसा उस मानसिकता को भी दिखाता है जहां हम सुरक्षा मानकों को महत्व नहीं देते। कहीं लाइफगार्ड को खर्च मानकर अनदेखा कर दिया जाता है, तो कहीं सुरक्षा की बातें “मूड खराब करने वाली” लगती हैं।


यह केवल शिखर की मौत नहीं, एक व्यवस्था की मौत है

शिखर सिंह की मौत महज एक व्यक्ति की नहीं थी — यह उस सोच की मौत थी जहां जीवन की कीमत से ज्यादा अहम पार्टी की चमक और दिखावा बन चुका है।

जब तक हम सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं देंगे, जब तक आयोजनों और पब्लिक स्पेस में प्रोफेशनल और जवाबदेह व्यवस्था नहीं होगी, ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे।


क्या हो अगला कदम?

👉 हर सार्वजनिक स्विमिंग पूल और वाटर पार्क में लाइफगार्ड की उपस्थिति कानूनी रूप से अनिवार्य की जाए।
👉 आयोजकों और पूल प्रबंधन पर निगरानी रखने के लिए नगर निगम या जिला प्रशासन की नियमित जांच व्यवस्था बने।
👉 आम लोगों में जागरूकता फैलाई जाए कि ऐसी जगहों पर सुरक्षा नियमों का पालन करना क्यों जरूरी है।


अंत में, समाज को भी सीख लेनी होगी

शिखर सिंह एकमात्र बेटा था। उसकी मां और बहन तो बेटे की मौत की खबर सुनते ही बेसुध हो गईं। लेकिन हमें यह समझना होगा कि यह दर्द किसी और का नहीं, हम सबका है।

अगर हम सुरक्षा को महज औपचारिकता मानेंगे और जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करते रहेंगे, तो हर पार्टी के बाद एक शोकसभा की बारी होगी।

कह सकते हैं — “मौत ने दो मिनट तक आवाज़ लगाई, लेकिन मस्ती में डूबा समाज सुन न सका।”

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