February 9, 2026
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) को सोमवार, 15 जुलाई को एक ऐतिहासिक सौगात मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय में 941 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित और आधुनिक स्वास्थ्य परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है।

यह दिन केजीएमयू के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है, जहां सिर्फ इमारतें नहीं बन रही हैं, बल्कि स्वास्थ्य की आधारशिला और एक नए उत्तर प्रदेश की कल्पना को मूर्त रूप दिया जा रहा है।


क्या मिला केजीएमयू को इस सौगात में?

केजीएमयू प्रवक्ता प्रोफेसर के.के. सिंह ने बताया कि सोमवार शाम चार बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर निम्नलिखित भवन और परियोजनाएँ शामिल रहीं:

🏥 लोकार्पण की गई परियोजनाएँ:

  1. 92 बेड का अत्याधुनिक आईसीयू भवन (कार्डियोलॉजी विभाग में):
    यह भवन हार्ट पेशेंट्स के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, जहां उन्नत जीवनरक्षक तकनीकों से लैस सुविधा उपलब्ध होगी।
  2. 340 बेड का ऑर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी सेंटर:
    उत्तर भारत में अपनी तरह की एक अलग पहचान बनाने वाला यह सेंटर हड्डी और जोड़ से जुड़ी बीमारियों के इलाज में विशेष होगा।

🏗️ शिलान्यास की गई प्रमुख परियोजनाएँ:

  1. 300 बेड की क्षमता वाला जनरल सर्जरी विभाग का नया भवन
  2. 500 बेड वाला ट्रॉमा-2 भवन
  3. 450 बेड की क्षमता वाला पांच मंज़िला डायग्नोस्टिक सेंटर
  4. नया प्रशासनिक भवन
  5. 14 कमरों वाला गेस्ट हाउस

इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य एक ही है — स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाना और राज्य के नागरिकों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना।


एक मेडिकल संस्था का कायाकल्प

केजीएमयू देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक है। इसका नाम आज केवल लखनऊ या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुका है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या, मरीजों की संख्या और बीमारियों की जटिलता ने इस पर दबाव डाला था।

941 करोड़ रुपये की यह नई सौगात केजीएमयू की क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्ध संसाधनों को अत्यधिक बढ़ावा देगी।


क्यों ज़रूरी था यह निवेश?

  • मरीजों का दबाव:
    हर साल केजीएमयू में लाखों मरीज इलाज के लिए आते हैं। कई बार ICU या सर्जरी वार्ड में बेड की कमी, डायग्नोस्टिक देरी और स्टाफ का बोझ सामने आता रहा है।
  • आधुनिकता की ज़रूरत:
    नई बीमारियाँ और इलाज की नई तकनीकों के लिए अपग्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर ज़रूरी था।
  • शोध और शिक्षा:
    यह परियोजनाएँ न सिर्फ इलाज के लिए, बल्कि मेडिकल स्टूडेंट्स और शोधार्थियों के लिए भी नई संभावनाएँ खोलेंगी।

भवनों से आगे — एक दृष्टिकोण

इस पहल को केवल एक निर्माण परियोजना की तरह देखना इसकी अहमियत को कम आंकना होगा। यह एक विजन है — जहां स्वास्थ्य सेवा, मेडिकल शिक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और रिसर्च व इनोवेशन एक साथ जुड़ते हैं।

उदाहरण के तौर पर:

  • ट्रॉमा-2 सेंटर केवल इमरजेंसी सेवा नहीं होगा, बल्कि एक हाई-टेक ट्रॉमा रिस्पॉन्स सिस्टम का हिस्सा बनेगा।
  • डायग्नोस्टिक सेंटर में अत्याधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री आदि एक ही छत के नीचे होंगे — जिससे रोग की पहचान तेज़ और सटीक होगी

स्वास्थ्य सेवाओं में सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा,

“स्वस्थ उत्तर प्रदेश ही समृद्ध उत्तर प्रदेश की नींव है। हम हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए संकल्पित हैं। केजीएमयू को यह सौगात उसी दिशा में एक ठोस प्रयास है।”

योगी सरकार का यह स्पष्ट रुख दिखाता है कि उनका ध्यान सिर्फ सड़कों और कानून व्यवस्था पर नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य सुधार पर भी उतना ही गंभीर है।


मौजूद रहे विशेष अतिथि

इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक और राज्य स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। दोनों ने मुख्यमंत्री के विजन की सराहना की और भरोसा दिलाया कि ये परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी


जनता और डॉक्टरों की प्रतिक्रिया

  • डॉक्टरों का कहना है:
    “नए आईसीयू और सुपर स्पेशियलिटी वार्ड से हम कई जिंदगियों को बेहतर और तेज़ उपचार दे सकेंगे।”
  • मरीजों के परिजन बोले:
    “अब हमें शहर के बाहर या निजी अस्पतालों में भागने की ज़रूरत नहीं होगी।”

भविष्य की योजना?

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में केजीएमयू में और भी कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं, जिनमें डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम, रोबोटिक सर्जरी यूनिट और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के साथ टेलीमेडिसिन कनेक्शन शामिल हैं।


941 करोड़ रुपये की यह परियोजना केवल पत्थर और ईंट का ढांचा नहीं है। यह एक विज़नरी सोच का प्रतीक है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा को सुलभ, आधुनिक और समर्पित बनाने की सच्ची मंशा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सौगात के ज़रिए स्पष्ट संकेत दे दिया है कि उत्तर प्रदेश अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछड़ा नहीं रहेगा — वह नेतृत्व करेगा


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