लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा तहसील के ग्राम बबुरी में बुधवार को ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया। एक ईंट भट्टे पर अचानक आ धमके तेंदुए ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। लेकिन जो हुआ वो किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। गांव का एक युवक अपनी जान पर खेल गया और तेंदुए से भिड़ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेंदुआ ईंट भट्टे की ओर भटकते हुए पहुंचा था। वहां काम कर रहे और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान गांव का एक युवक साहस दिखाते हुए तेंदुए को दबोचने की कोशिश करने लगा।
तेंदुए से युवक की जानलेवा जद्दोजहद
ग्रामीणों ने बताया कि युवक काफी देर तक तेंदुए को दबोचे रहा। उसके इस साहसिक कदम को देखकर दर्जनों लोग जुट गए और उन्होंने तेंदुए पर ईंट-पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। भीड़ और शोर-शराबे से तेंदुआ बुरी तरह बौखला गया और किसी तरह खुद को छुड़ाकर युवक पर दुबारा झपट पड़ा।
इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में ग्रामीणों ने घायल युवक को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां उसका इलाज जारी है।
वन विभाग की टीम पहुंची मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम गांव पहुंच गई। टीम ने तेंदुए की तलाश शुरू कर दी और ग्रामीणों से संयम बरतने की अपील की। वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि तेंदुआ शायद जंगल से भटककर भट्टे की ओर आ गया था और खुद डर की स्थिति में था।
वन विभाग ने तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि उसे वापस जंगल में छोड़ा जा सके।
हैरान कर देने वाला वीडियो वायरल
इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक तेंदुए को काबू करने की कोशिश करता है और कैसे भीड़ ईंट-पत्थरों से हमला करती है। यह दृश्य किसी रेस्क्यू ऑपरेशन से कम नहीं लगा, लेकिन यह भी दिखा गया कि कैसे मानव और वन्यजीव संघर्ष दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है।
जंगल और इंसानी बस्तियों की टकराहट
यह घटना सिर्फ एक तेंदुए के गांव में भटक आने की नहीं है। यह उस बड़ी समस्या का संकेत है जिसमें इंसानी बस्तियां और जंगल की सीमाएं लगातार धुंधली होती जा रही हैं। तेंदुए का गांव तक आ जाना इस बात का प्रमाण है कि उसका प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है।
ऐसी घटनाएं न सिर्फ इंसानी जान के लिए खतरा हैं बल्कि वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा करती हैं।
सवाल उठता है: क्या तैयारी है हमारी?
👉 आखिर क्यों वन विभाग के पास ऐसी त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था नहीं है जिससे इनकी जान बचाई जा सके?
👉 क्यों इन जानवरों को बार-बार रिहायशी इलाकों में भटकना पड़ता है?
👉 और क्यों हर बार समाधान भीड़ की हिंसा ही बन जाती है?
ग्रामीणों की साहस की तारीफ की जानी चाहिए, लेकिन क्या यही रास्ता है? क्या हमें ऐसे हालात को रोकने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत नहीं है?
जरूरत है संवेदनशीलता की
जहां एक ओर हम वन्यजीव संरक्षण की बातें करते हैं, वहीं ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। हमें जरूरत है कि इंसानी और वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए बेहतर नीति बनाई जाए, गांवों में वन विभाग की त्वरित रेस्क्यू टीम हो और लोगों को इस तरह की स्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग दी जाए।
अंत में एक सबक
इस घटना ने एक बार फिर हमें आगाह किया है कि विकास और जंगल के नाम पर हम जो भी कर रहे हैं, वो हमें और हमारे पर्यावरण दोनों को खतरनाक मोड़ पर ले जा रहा है। अब समय है कि हम सिर्फ वायरल वीडियो देखने या हीरो बनाने से आगे बढ़ें और असली समाधान तलाशें।
