लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय से महज़ आधा किलोमीटर दूर ओमैक्स सिटी R1 की एक फ्लैट से ऐसा राज़ उजागर हुआ है, जिसने राजधानी के सभ्य समाज और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर दिन के उजाले में सब कुछ सामान्य दिखता रहा, लेकिन रात के अंधेरे में इस फ्लैट से चल रहा था अंतरराष्ट्रीय तस्करी और देह व्यापार का खौफनाक खेल।
इस फ्लैट में रह रहा था त्रिजिन राज उर्फ अर्जुन राणा (33), जो खुद को GTS न्यूज़ का पत्रकार बताता था। उसके साथ लिव-इन में थी उज्बेक नागरिक लोला कायुमोवा (48)। यहीं पर दो अन्य उज्बेक महिलाएं — होलिडा और निलोफर — भी रहती थीं। जांच में पता चला है कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि लखनऊ में 11 साल से प्रैक्टिस कर रहा प्लास्टिक सर्जन डॉ. विवेक गुप्ता है।
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. गुप्ता — जिनकी ट्रेनिंग केजीएमयू और मुंबई के KEM अस्पताल से हुई है — न केवल सौंदर्य सर्जरी करता था, बल्कि लाखों रुपये लेकर विदेशी महिलाओं की पहचान बदलने में जुटा था। FRRO (विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय) को मिले इनपुट के आधार पर सुशांत गोल्फ सिटी थाना पुलिस ने छापा मारा और होलिडा व निलोफर को हिरासत में लिया। दोनों ने पूछताछ में खुलासा किया कि वे दो साल पहले भारत आईं थीं और उनका पासपोर्ट व वीजा छीना गया। लोला ने उन्हें भारत लाने का जाल बुना और त्रिजिन ने उनके लिए फर्जी आधार और वोटर कार्ड बनवाए।
चौंकाने वाली बात यह रही कि डॉ. गुप्ता ने अपनी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर इन महिलाओं की प्लास्टिक सर्जरी कर दी ताकि वे भारतीय नागरिक लगें। जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह ने न सिर्फ इन महिलाओं को बल्कि अन्य विदेशी नागरिकों को भी इसी तरह फंसाया।
पुलिस ने त्रिजिन का फर्जी पत्रकार आईडी कार्ड, बैंक दस्तावेज़, आधार कार्ड, लोला का पासपोर्ट और अन्य कागज़ात बरामद किए हैं। फिलहाल डॉ. गुप्ता, त्रिजिन और लोला फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ओमैक्स R1 सोसायटी की RWA की भूमिका भी संदेह के घेरे में है — ऐसे लोगों को फ्लैट कैसे किराए पर दे दिया गया जबकि इतनी बड़ी अनियमितताएं मौजूद थीं?
जब एक पवित्र पेशा हो जाए काले धंधे का साथी
यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है। यह हमारी व्यवस्था, नैतिकता और पेशेवर जिम्मेदारियों पर गहरा प्रश्नचिन्ह लगाता है। डॉक्टर — जिसे जीवनदाता कहा जाता है — अगर पहचान बदलकर तस्करी और देह व्यापार को सहयोग देने लगे, तो समाज की बुनियाद ही हिल जाती है। जब चिकित्सा जैसे पवित्र पेशे का दुरुपयोग इस हद तक होने लगे, तो सोचिए कि भविष्य में भारत के कानून, स्वास्थ्य सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय छवि पर कितना गंभीर असर पड़ेगा। अगर ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई और निगरानी नहीं की गई, तो न केवल अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे, बल्कि भारत की पहचान भी वैश्विक मंच पर धूमिल होगी।
अब समय आ गया है कि कानून और चिकित्सा परिषदें मिलकर इस तरह के अपराधों पर न केवल कठोर नियंत्रण लगाएं बल्कि इस बात को सुनिश्चित करें कि कोई भी पेशा, चाहे वह चिकित्सा हो, पत्रकारिता या कोई अन्य, अपराध का साधन न बने — वरना भारत के भविष्य पर गहरा संकट मंडराएगा।
