February 4, 2026
Close-up of crime scene tape with 'Do Not Cross' text, outdoors setting.

लेखक: वो कलम, जो सत्ता से सवाल पूछती है

लखनऊ… वो राजधानी जिसे कभी नवाबी तहज़ीब और कानून व्यवस्था के लिए जाना जाता था। वही लखनऊ अब गला रेतने की राजधानी बनता जा रहा है। मंगलवार की दोपहर, जब मुख्यमंत्री साहब शायद विकास योजनाओं की फाइलें उलट-पलट कर देख रहे होंगे या ‘ठोक दो’ नीति पर गर्व कर रहे होंगे, तभी उसी लखनऊ के अर्जुन एनक्लेव में एक ठेकेदार की गला रेतकर हत्या कर दी जाती है।

उमाशंकर सिंह — गिट्टी-मोरंग का कारोबार करने वाले एक आम आदमी। दो महीने पहले ही सुल्तानपुर से राजधानी आए थे शायद इसी भरोसे पर कि बड़े शहर में कानून ज़रा ज्यादा मजबूत होता होगा। लेकिन वो नहीं जानते थे कि लखनऊ की गलियों में आजकल गुंडई का वो राज चल रहा है, जिसे योगी आदित्यनाथ की सरकार रामराज्य कहती है।

गुंडों के भरोसे रामराज्य

अब सरकार के मुखिया से कोई पूछे कि साहब, ये कैसा रामराज्य है जहां राम का नाम तो हर दीवार पर लिखा है लेकिन लोगों की गर्दनें बेरहमी से रेत दी जा रही हैं? अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और पुलिस केवल पोस्टमॉर्टम कराने में माहिर हो चुकी है।

“रामराज्य की दुहाई देने वालों के राज में अब राम नाम सत्य की गूंज लाश उठाने वालों की आवाज़ में बदल चुकी है।”

सिस्टम का ढोल और गूंगी पुलिस

पुलिस की प्रेस नोट पढ़ लीजिए। डीसीपी साहब कह रहे हैं —

“मामला दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। हर पहलू से जांच हो रही है।”

यही वही जुमला है जो हर मर्डर, हर रेप, हर डकैती के बाद सुनने को मिलता है। पुलिस की कार्रवाई अब जांच नहीं, खानापूरी हो गई है। सीसीटीवी की फुटेज चेक करने वाली पुलिस से कोई पूछे कि अपराधियों का हौसला इतना बुलंद क्यों है?


महिलाएं अब किरदार नहीं, साज़िश की कहानियों का हिस्सा

और देखिए, इस पूरे मामले में कैसे एक महिला को केंद्र में रखकर पुलिस सारा घटनाक्रम उलझा रही है। जैसे महिला हो या ना हो, गुंडाराज तो सरेआम है। लेकिन सत्ता को दिखाना है कि ‘पुलिस काम कर रही है’ — तो महिला से पूछताछ होती रहे, सीसीटीवी देखे जाते रहें और असली सवालों पर पर्दा डाल दिया जाए।

“क्या लखनऊ अब क्राइम कैपिटल है? क्या योगी जी की पुलिस सिर्फ कागज़ों पर कानून व्यवस्था चला रही है?”

गुंडाराज का प्रमाण पत्र — हर लाश के साथ

कहते हैं, उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर नकेल कसी जा रही है। लेकिन आंकड़े और घटनाएं कुछ और ही कहानी कहती हैं। हर दिन अखबारों में हत्या, लूट, बलात्कार की खबरें रामराज्य की असलियत बयां करती हैं।

उमाशंकर सिंह की हत्या इस बात का सुबूत है कि अब यूपी में हत्या करने वालों को सत्ता का वरदहस्त प्राप्त है। अपराधी जानते हैं — सिस्टम में उनके लिए जगह हमेशा खाली है।


अंत में जनता से एक सवाल

👉 क्या यही वो रामराज्य है जिसका वादा भाजपा ने किया था?
👉 क्या योगी जी की ठोक दो नीति अब खुद अपने ही नागरिकों की गर्दनें ठोकने लगी है?
👉 क्या लखनऊ में आम आदमी की जान अब भगवान भरोसे छोड़ दी गई है?

“लखनऊ की गलियों में अब गला रेतने वालों की सत्ता है। पुलिस की जीपें सिर्फ सायरन बजाती हैं, इंसाफ अब सिर्फ फाइलों में लिखा जाता है। रामराज्य में राम का नाम बिकता है और इंसानियत की लाश उठाई जाती है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *