February 9, 2026
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लखनऊ | Choir India News Network
उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जो एक बार फिर सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादा के बीच की पतली रेखा को रेखांकित करता है। समाजवादी पार्टी के एक कार्यकर्ता रणदीप गुप्ता उर्फ विक्की गुप्ता द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने जिले के शांत सामाजिक वातावरण को झकझोर कर रख दिया है।

बताया जा रहा है कि यह टिप्पणी रणदीप गुप्ता के फेसबुक अकाउंट से की गई, जिसमें उन्होंने लिखा —
“भारत के संविधान की क्या पहचान, भंगी और ब्राह्मण एक समान?”
यह कथन न सिर्फ जातीय स्तर पर गहरी पीड़ा और असंतोष को जन्म देने वाला है, बल्कि भारतीय संविधान की गरिमा पर भी सीधा आघात है।


सोशल मीडिया की आग, समाज में आक्रोश

यह विवादास्पद पोस्ट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद ब्राह्मण समाज में भारी रोष और नाराजगी फैल गई। कई सामाजिक संगठनों ने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां समाज को विभाजित करने की साज़िश हैं और इसका उद्देश्य राजनीतिक ध्रुवीकरण और जातीय तनाव बढ़ाना हो सकता है।

ब्राह्मण समाज की ओर से रणदीप गुप्ता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।


समाजवादी पार्टी की ज़िम्मेदारी कहाँ है?

रणदीप गुप्ता का संबंध समाजवादी पार्टी से बताया जा रहा है। इस संदर्भ में सवाल यह उठता है कि क्या पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक बर्ताव पर अनुशासन और जिम्मेदारी तय करेगी, या फिर यह मामला राजनीतिक चुप्पी में दबा दिया जाएगा?

जातीय समरसता और सामाजिक सौहार्द के जिस विचार की बात समाजवादी पार्टी अक्सर करती है, क्या यह घटना उस विचारधारा से मेल खाती है?


समाज के लिए एक चेतावनी

यह घटना न सिर्फ एक व्यक्ति की व्यक्तिगत सोच का परिचायक है, बल्कि यह संकेत भी है कि सोशल मीडिया आज विचार-विरोध की जगह, विचार-विष का माध्यम बनता जा रहा है। एक सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार की टिप्पणियाँ, संविधान, समाज और राजनीतिक दल — तीनों की नैतिकता पर सवाल उठाती हैं।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित राजनीतिक दल इस प्रकरण पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं — क्या सियासत संवेदनशीलता पर भारी पड़ेगी, या संविधान की मर्यादा की रक्षा होगी?


आप इस विषय पर क्या सोचते हैं?
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