नोएडा:
शहर के एक प्रतिष्ठित माने जाने वाले डे-केयर सेंटर से आई एक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक मासूम बच्चे के पैरों पर गहरे दांत के निशान और शरीर पर चोट के स्पष्ट घाव दिख रहे हैं। इस भयावह फुटेज ने न केवल माता-पिता के दिलों में डर भर दिया है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो का दर्दनाक सच
वायरल वीडियो में बच्चा भय और दर्द से सहमा हुआ नज़र आता है। पैरों पर दांत के गहरे कटाव और शरीर पर पिटाई के निशान यह साबित करते हैं कि उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के लिए असहनीय है — क्योंकि पीड़ा झेलने वाला बच्चा न तो खुद अपनी रक्षा कर सकता है और न ही अपनी तकलीफ़ बयान कर सकता है।
माता-पिता का टूटा भरोसा
पीड़ित बच्चे के माता-पिता का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चे को एक सुरक्षित और स्नेहमयी माहौल की उम्मीद में डे-केयर भेजा था, लेकिन जो कुछ हुआ उसने उनकी उम्मीदों और भरोसे को चकनाचूर कर दिया। उनका सवाल है — “अगर डे-केयर भी बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं, तो माता-पिता अपने काम और बच्चों की देखभाल के बीच संतुलन कैसे बनाएंगे?”
पुलिस और आयोग की कार्रवाई
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। डे-केयर के स्टाफ और प्रबंधन से पूछताछ जारी है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी मामले पर संज्ञान लिया है और विस्तृत रिपोर्ट की मांग की है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
यह सिर्फ एक घटना नहीं, एक चेतावनी है
सवाल सिर्फ इस मासूम की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि पूरे बचपन की सुरक्षा का है। डे-केयर, स्कूल और ऐसे सभी संस्थान सिर्फ चारदीवारी और लाइसेंस से सुरक्षित नहीं बन जाते। यहां काम करने वाले लोगों के लिए सख्त बैकग्राउंड चेक, नियमित निरीक्षण और रियल-टाइम निगरानी जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं।
हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं, जहां माता-पिता अपने बच्चों को भरोसे से छोड़ सकें, यह विश्वास धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है — क्या हम बच्चों को वह सुरक्षित बचपन दे पा रहे हैं, जिसका वे हकदार हैं?
समाज और कानून की जिम्मेदारी
बचपन की मुस्कान को आंसुओं में बदलने का हक किसी को नहीं। यह घटना सिर्फ एक पुलिस केस नहीं, बल्कि एक सामाजिक जागरूकता की पुकार है। हमें ऐसे कड़े कानून बनाने और लागू करने होंगे, जिनसे बच्चों पर हिंसा करने वालों को तुरंत और कड़ी सजा मिले। साथ ही, माता-पिता को भी डे-केयर चुनते समय सतर्क रहना होगा और सुरक्षा उपायों की जांच करनी होगी।
