सामुदायिक स्कूल का उद्देश्य
सहारनपुर के रामनगर में शुरू की गई “PDA पाठशाला” का उद्देश्य है—गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा उपलब्ध कराना, साथ ही उन्हें सामाजिक और राजनीतिक सोच से भी परिचित कराना। यहां पढ़ाई में राजनीतिक संदेशों को भी शामिल किया गया है, जिससे बच्चों में जागरूकता का बीड़ा उठाया जा सके।
शिक्षण पद्धति में राजनीति की छाप
इस स्कूल में अंग्रेजी वर्णमाला इस तरह पढ़ाई जा रही है:
- A for Akhilesh Yadav,
- B for Babasaheb Bhimrao Ambedkar,
- C for Chaudhary Charan Singh,
- D for Dimple Yadav,
- M for Mulayam Singh Yadav—
साथ ही A for Apple, B for Ball जैसे पारंपरिक शब्द भी।
शिक्षण प्रारंभ और विस्तार
पहली पाठशाला की शुरुआत SP कार्यकर्ता फ़राज़ आलम गड़ा ने 25 बच्चों के साथ की थी, जो अब 60 से अधिक छात्रों तक पहुंच चुकी है। गड़ा का कहना है:
“यह सिर्फ एक स्कूल नहीं है, बल्कि एक आंदोलन है… BJP सरकार ने सरकारी स्कूल बंद कर दिए, जिससे गरीब बच्चों की शिक्षा छिन गई।
रणनीतिक और वैचारिक उद्देश्य
गड़ा ने बताया कि इसका उद्देश्य दो‑तरफा है: शिक्षा प्रदान करना और बच्चों को सामाजिक‑राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाना:
“आज का बच्चा कल का नागरिक है… अगर आज उनके सोच को मजबूत करें, तो वे कल अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठा सकेंगे।
उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को कमजोर कर रही है ताकि वंचित वर्गों को उनके अधिकारों से अनभिज्ञ रखा जा सके। “यदि शिक्षा होगी, तो सवाल होंगे, और सवाल लोकतंत्र की नींव है।
संचालन और विस्तार की योजना
- इस पाठशाला को स्थानीय SP कार्यकर्ताओं और शिक्षकों द्वारा स्वयंसेवी तरीके से चलाया जा रहा है।
- सरकार से कोई सहायता नहीं मिल रही; संचालन केवल समुदाय के सहयोग पर आधारित है।
- उद्देश्य है—जहाँ सरकारी स्कूल बंद हुए हैं या हैं अनुपलब्ध, वहां और PDA पाठशालाएं शुरू करना|
प्रभाव और प्रतिक्रिया
शुरुआत में प्रभावित सीमित बच्चों की संख्या अब बढ़ चुकी है, जिसका मतलब है कि यह पहल लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। SB की रणनीति स्पष्ट है—सरकार शिक्षा के द्वार बंद करे, तो वे इसे अपनी पहल से बुलंद करेंगे:
“अगर सरकार पढ़ाएगी नहीं, तो हम पढ़ाएंगे।”
सारांश तालिका
| पहलु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | रामनगर, सहारनपुर (यूपी) |
| शिक्षा का उद्देश्य | मुफ़्त शिक्षा + राजनीतिक एवं सामाजिक जागरूकता |
| अल्फाबेट शिक्षण | A‑Akhilesh, B‑Ambedkar, C‑Charan Singh, D‑Dimple, M‑Mulayam Singh |
| शुरूआत | पहले दिन 25 बच्चे; अब लगभग 60+ |
| संचालन | SP कार्यकर्ता व स्वयंसेवी शिक्षक |
| सरकारी भूमिका | पास नहीं, समुदाय संचालित |
| भविष्य की योजना | स्कूल बंद क्षेत्रों में विस्तार |
इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चों में सामाजिक और राजनीतिक चेतना भी गढ़ने की कोशिश की जा रही है। यह नीतिगत बदलावों के प्रति एक प्रतिवाद के रूप में सामने आई है, जिसमें शिक्षा को राजनीतिक और सामाजिक जानकारी से जोड़कर सशक्त बनाने की योजना है।
