42 साल की उम्र में अचानक हुई एक्ट्रेस शिफाली जरीवाला की मौत ने फिर एक बार एक गहरी चिंता खड़ी कर दी है—क्या उपवास के दौरान खाली पेट ली गई एंटी-एजिंग दवाएं जानलेवा हो सकती हैं?

बंगाल के फिल्म और मॉडलिंग इंडस्ट्री में जवान दिखने की चाह इस कदर बढ़ चुकी है कि कई लोग बिना डॉक्टरी निगरानी के टैबलेट और इंजेक्शन का सहारा ले रहे हैं। हालांकि अब तक कोई मेडिकल रिपोर्ट यह नहीं कहती कि जरीवाला की मौत सीधे एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट से जुड़ी है, लेकिन यह घटना उन सभी के लिए एक चेतावनी जरूर है जो उम्र को मात देने की जल्दबाजी में स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर बैठते हैं।
अभिनेत्री कोनीनिका बनर्जी, जिन्होंने कुछ समय पहले ‘कांटा लगा’ लुक में एक फोटोशूट किया था, खुद इस चक्कर में फंस चुकी हैं। उन्होंने बताया, “मैंने वज़न कम करने के लिए एक साल तक हेल्थ सप्लीमेंट्स लिए। ना वज़न घटा, उल्टा फैटी लिवर की बीमारी हो गई। तब मुझे समझ आया कि बिना सही जानकारी के रिवर्स एजिंग के चक्कर में पड़ना कितना खतरनाक हो सकता है।”
कंसल्टेंट कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. मनोज खन्ना के मुताबिक, कोविड के बाद कोलकाता में एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट की मांग तीन गुना बढ़ गई है। “दो वर्ग हैं—एक जो फिल्मी दुनिया से है और जल्दी रिजल्ट चाहता है, दूसरा युवा वर्ग जो धैर्य नहीं रखता। बाकी लोग थोड़ा धीरे-धीरे चलते हैं,” उन्होंने बताया।
अब लोग सिर्फ बोटॉक्स और फिलर्स ही नहीं, बल्कि स्किन व्हाइटनिंग, ब्राइटनिंग, टाइटनिंग, स्पॉट रिमूवल, थ्रेड लिफ्टिंग और एक्सोसोम ट्रीटमेंट तक का सहारा ले रहे हैं।
खन्ना बताते हैं, “ग्लूटाथायोन इंजेक्शन, जो स्किन को गोरा करने के लिए दिए जाते हैं, इन दिनों बहुत पॉपुलर हैं। ये शरीर की पिग्मेंटेशन घटाते हैं। लेकिन ये तब ही सुरक्षित हैं जब योग्य डॉक्टर की निगरानी में दिए जाएं।”

पुलिस ने जरीवाला के घर से यही इंजेक्शन, विटामिन C और एसिडिटी की गोलियां बरामद कीं। डॉक्टर के निर्देशों का पालन न करना जानलेवा हो सकता है। आजकल कुछ सैलून तक में बोटॉक्स और फिलर्स दिए जा रहे हैं, जो बिना मेडिकल सुपरविजन के अंधापन या स्ट्रोक तक का कारण बन सकते हैं।
डॉ. खन्ना चेतावनी देते हैं कि कोई भी कॉस्मेटिक सर्जरी कराने से पहले ब्लड थिनर, विटामिन ई, शराब, सिगरेट और हार्मोन पिल्स को कम से कम एक हफ्ते पहले बंद कर देना चाहिए।
कुछ समय पहले कोनीनिका बनर्जी एक एक्ट्रेस से मिलीं जिन्हें वह पहचान नहीं पाईं। “सबके होंठ सूजे हुए, स्किन टोन गुलाबी, और चेहरों में कोई अलग पहचान नहीं रही। ये ट्रीटमेंट्स सबको एक जैसा बना रहे हैं। हर शरीर का रिएक्शन अलग होता है, और इन्हें बिना मेडिकल गाइडेंस लेना बहुत बड़ा रिस्क है।”
यह केवल सुंदरता की बात नहीं, बल्कि अब यह सेहत और जिंदगी से खिलवाड़ बन चुका है। शिफाली जरीवाला की मौत हमें याद दिलाती है कि खूबसूरत दिखने की होड़ में ज़िंदगी की कीमत मत चुकाइए।
