
27 अगस्त 2025 से भारत के लिए हालात मुश्किल हो गए हैं। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया है। यानी भारत से अमेरिका जाने वाला दो-तिहाई माल अब महँगा पड़ने वाला है। असर इतना गहरा है कि कई सेक्टर ताश के पत्तों की तरह बिखर सकते हैं।
सबसे बड़ी चोट कहाँ लगी:
भारत हर साल लगभग 86.5 अरब डॉलर का माल अमेरिका भेजता है। लेकिन ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का अनुमान है कि इस टैरिफ के बाद कई सेक्टरों का निर्यात 70% तक गिर सकता है। यानी 60 अरब डॉलर का निर्यात सीधे घटकर करीब 18 अरब डॉलर रह जाने का खतरा है।
- झींगा मछली (Shrimp Export):
अमेरिका में शुल्क अब 60% तक पहुँच चुका है। आंध्र प्रदेश के किसान सबसे पहले मार खाएँगे। विशाखापट्टनम और पश्चिम गोदावरी के प्रोसेसिंग प्लांट संकट में हैं। - हीरे और ज्वेलरी सेक्टर:
अब तक केवल 2% ड्यूटी देने वाला यह उद्योग अब 52% से ज़्यादा टैक्स झेलेगा। सूरत, मुंबई और जयपुर जैसे शहरों में लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी दाँव पर लग सकती है। - कपड़ा, चमड़ा, ऑटोमोबाइल और फूड प्रॉडक्ट्स:
इन सेक्टरों का अमेरिका में मुकाबला वियतनाम और चीन जैसे देशों से होगा, जहाँ टैरिफ कम है। भारत की प्रतिस्पर्धा यहाँ कमज़ोर पड़ जाएगी।
बड़ा असर:
ये सिर्फ़ शुल्क नहीं है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा झटका है। अनुमान है कि इसका असर भारत की जीडीपी पर भी होगा और अगले वित्त वर्ष में विकास दर लगभग 1% तक नीचे आ सकती है। लाखों नौकरियाँ भी खतरे में पड़ सकती हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि:
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है और यही वजह है कि “सज़ा” के तौर पर यह डबल टैरिफ लगाया गया। इससे पहले अगस्त की शुरुआत में अमेरिका ने 25% का “रिसिप्रोकल” टैरिफ लगाया था, जिसे अब दोगुना कर दिया गया।
भारत सरकार ने इसे लेकर सख़्त रुख अपनाया है और कहा है कि देश अपनी आर्थिक स्वतंत्रता से समझौता नहीं करेगा। सरकार किसानों और MSME सेक्टर को राहत देने की तैयारी में है।