
लखनऊ/गाज़ीपुर | संपादकीय विश्लेषण
उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर व पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी को पुलिस ने लखनऊ के दारुलशफ़ा स्थित विधायक निवास से हिरासत में ले लिया है। यह गिरफ्तारी एक गंभीर धोखाधड़ी प्रकरण के तहत की गई है, जिसमें उमर अंसारी पर न्यायालय को गुमराह करने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध लाभ लेने का संगीन आरोप है।
मामले की जड़ें उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) के अंतर्गत की गई उस कार्यवाही से जुड़ी हैं, जिसमें मुख्तार अंसारी से संबंधित संपत्ति जब्त की गई थी। इस संपत्ति को मुक्त कराने के लिए न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी। लेकिन जांच के दौरान यह सामने आया कि याचिका में प्रस्तुत दस्तावेज़ों में गंभीर हेराफेरी की गई थी।
आरोप है कि उमर अंसारी ने अपनी मां, अफ़सा अंसारी — जिन पर पहले से ₹50,000 का इनाम घोषित है — के फर्जी हस्ताक्षर कर, उनके नाम से दस्तावेज़ तैयार कर अदालत में दाखिल किए। यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत, संपत्ति को पुनः प्राप्त करने और न्याय व्यवस्था को भ्रमित करने के इरादे से किया गया।
गंभीरता तब और बढ़ गई जब इस पूरे मामले की जानकारी मिलने पर गाजीपुर जिले के मुहम्मदाबाद थाने में उमर अंसारी के खिलाफ अपराध संख्या 245/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 319(2), 318(4), 338, 336(3) और 340(2) में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
इस कार्रवाई की पुष्टि गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ने करते हुए बताया कि उमर अंसारी को विधिक प्रक्रिया के तहत हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ अग्रिम जांच व कार्रवाई जारी है।
यह मामला न केवल एक अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि किस तरह से प्रभावशाली व्यक्ति कानून की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास करते हैं। यह जांच न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता की कसौटी पर एक बार फिर पुलिस और प्रशासन को मजबूत भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है।
जहां एक ओर यह कार्रवाई कानून की पकड़ मजबूत होने का संकेत है, वहीं यह सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर ऐसी फर्जी दस्तावेज़ी प्रक्रिया किन स्तरों पर पार हो जाती है और क्या हमारी संस्थाएं इस तरह के मामलों को समय रहते पकड़ने में सक्षम हैं?
अब देखना यह होगा कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में क्या उमर अंसारी को दोषी ठहराया जाता है और क्या यह केस एक नज़ीर बन पाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं — चाहे वह किसी प्रभावशाली परिवार से ही क्यों न हो।