February 9, 2026
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उत्तर प्रदेश में आगामी धार्मिक त्योहारों और कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियों का खाका खींचने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 जून 2025 को रात 9 बजे अपने आवास 5 कालिदास मार्ग से एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक करेंगे। इस बैठक में प्रदेश भर के तमाम प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह बैठक कानून व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन, ट्रैफिक व्यवस्था, विद्युत, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की तैयारी की गहन समीक्षा के लिए बुलाई जा रही है। इसमें प्रमुख सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान, नगर विकास, पर्यटन, पशुपालन, सिंचाई, ऊर्जा और पंचायत राज विभाग समेत अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

त्योहारों और कांवड़ यात्रा पर रहेगा विशेष फोकस

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। इसके चलते सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष बल देने की बात मुख्यमंत्री ने कही है। निर्देश दिए गए हैं कि सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी अपने-अपने जनपद में अब तक की तैयारियों की रिपोर्ट बैठक में प्रस्तुत करेंगे।

15 मिनट पहले से तय स्थान ग्रहण करने के निर्देश

आदेश के अनुसार सभी अधिकारी तय समय से कम से कम 15 मिनट पूर्व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे। बैठक से जुड़े सभी बिंदुओं की जानकारी और आवश्यक फीडबैक psupcm.2017@gmail.com ईमेल पर भेजने को कहा गया है।

कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर होगी पैनी नजर

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री अधिकारियों को यह भी निर्देश देंगे कि त्योहारों के दौरान किसी भी प्रकार की अफवाह, तनाव या अशांति की स्थिति न बनने पाए। पुलिस बल की तैनाती से लेकर खुफिया निगरानी तक हर स्तर पर सतर्कता बरतने की रणनीति बनाई जाएगी।

पर्यटन और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का होगा विस्तार

बैठक में पर्यटन विभाग और स्थानीय निकायों को तीर्थस्थलों और प्रमुख धार्मिक स्थलों की स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और यात्री सुविधाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री की इस प्रस्तावित बैठक को लेकर सभी संबंधित विभागों में तैयारियों को अंतिम रूप देने की कवायद शुरू हो गई है। यह बैठक न केवल प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करेगी बल्कि आगामी धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए नीति निर्धारण का अहम आधार बनेगी।

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