देश आज महंगाई और बेरोजगारी की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी आसान नहीं रही है, परिवार चलाना और बच्चों की परवरिश करना पहले से कहीं कठिन हो गया है। लेकिन इन चुनौतियों के बीच समाज में एक बेहद शर्मनाक प्रवृत्ति सामने आ रही है—कुछ लोग आसान पैसे की लालच में अपनी ही पत्नियों के अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो ने भारतीय समाज और संस्कृति को गहरी चोट पहुंचाई है।
भारतीय संस्कृति में स्त्री का सम्मान सर्वोपरि

भारतीय संस्कृति में स्त्री को “माँ” और “शक्ति” के रूप में पूजनीय स्थान प्राप्त है। विवाह सिर्फ़ दो व्यक्तियों का ही नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन माना जाता है। ऐसे में पति का अपनी पत्नी को सोशल मीडिया की अश्लीलता का हिस्सा बनाना न सिर्फ़ परिवार की गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों के भी विरुद्ध है।
भारत में हमेशा से पुरुष की पहचान उसके त्याग और ज़िम्मेदारी से होती रही है। असली मर्द वह है जो चाहे विपरीत परिस्थितियाँ हों या अभाव, फिर भी अपने परिवार की जरूरतें ईमानदारी और मेहनत से पूरी करे। यही कारण है कि देश का दिहाड़ी मज़दूर भी, भले ही दिन में 15-15 घंटे दूसरे राज्य में काम करे, लेकिन अपनी पत्नी और बेटियों की इज़्ज़त को किसी भी हाल में गिरने नहीं देता।
बच्चों के सामने अश्लीलता – एक सामाजिक खतरा

वायरल वीडियो में यह बात और भी चिंताजनक है कि अश्लील हरकतें बच्चों के सामने की जा रही हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मासूम बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर गहरा असर डाल सकता है। भारतीय संस्कृति में बच्चों को नैतिकता और संस्कारों की शिक्षा दी जाती है, वहीं इस तरह की घटनाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए गलत संदेश दे रही हैं।
कानून और सरकार की भूमिका
वर्तमान में भारत में आईटी एक्ट और पोर्नोग्राफी से जुड़े कई कानून मौजूद हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर बढ़ते इस ट्रेंड को रोकने के लिए और अधिक सख़्त कदम उठाने की ज़रूरत है। सरकार को ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान करना चाहिए, ताकि कोई भी परिवार की गरिमा और समाज की संस्कृति के साथ खिलवाड़ न कर सके।
समाज को करनी होगी पहल
सिर्फ़ कानून ही नहीं, बल्कि समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। परिवार और समुदाय को समझना होगा कि पैसा सब कुछ नहीं है। संस्कृति, इज़्ज़त और मूल्य किसी भी आर्थिक तंगी से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं। युवाओं को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल शिक्षा, रोज़गार और प्रेरणा के लिए होना चाहिए, न कि अश्लीलता फैलाने के लिए।
महंगाई और बेरोजगारी निश्चित रूप से गंभीर समस्याएँ हैं, लेकिन इनसे निपटने का रास्ता भारतीय संस्कृति के मूल्यों को ताक पर रखकर नहीं निकल सकता। हमें याद रखना होगा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों से है। इसलिए हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है कि अपने परिवार की गरिमा और स्त्रियों का सम्मान बनाए रखे और कठिनाइयों से जूझने के लिए मेहनत और ईमानदारी का रास्ता चुने, न कि अश्लीलता का।
